बड़ी कार्रवाई : तहसीलदार खंडारे, नायब तहसीलदार संध्या खोडे की जाँच के आदेश, हो सकता है निलंबन

जिप – पंस उपचुनाव मतदाता सूची में गड़बड़ी का मामला

चंद्रपुर / नागपुर : हाल ही में जिला परिषद और पंचायत समिति उपचुनाव के दौरान हिंगना तहसील अंतर्गत डिगडोह इसासनी सर्कल के मतदान केंद्र पर मतदाता सूची से मतदाताओं के नाम गायब होने के मामले में राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है. इस प्रकरण में राज्य निर्वाचन आयोग ने तहसीलदार संतोष खंडारे और नायब तहसीलदार संध्या खोडे व अन्य की तत्काल जाँच कराने के आदेश दिए है. उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के आदेश विभागीय आयुक्त को दिए गए हैं. निर्वाचन आयोग के सचिव किरण कुरुंदकर ने इस मामले में नागपुर की जिलाधिकारी विमला आर. को आदेश जारी किया है. आदेश में अपने स्तर पर विभागीय जांच करने को कहा है.

क्या था मामला ?

बता दें कि जिप व पंस उपचुनाव के दौरान हिंगना स्थित डिगडोह इसासनी के तीन मतदान केंद्रों पर मतदान मशीन नहीं पहुंचने के कारण संबंधित मतदाताओं को मताधिकार से वंचित रहना पड़ा था. हिंगना कार्यालय द्वारा कंट्रोल चार्ट में विधानसभा के सूची भाग क्रमांक 282 व 283 शामिल नहीं करने से 2494 मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए. इस कारण 2494 मतदाता मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाए. निर्वाचन आयोग ने कहा है कि घटना की जांच से पता चला है कि संबंधित अधिकारी – कर्मचारियों ने प्रारूप, अंतिम मतदाता सूची प्रसिद्ध होने के पूर्व उचित सावधानी नहीं बरती. इसके लिए जिम्मेदारी अधिकारी – कर्मचारी को तत्काल निलंबित किया जाए. इस मामले में अब तहसीलदार संतोष खंडारे और नायब तहसीलदार संध्या खोडे की निर्वाचन आयोग ने विभागीय आयुक्त को जांच करने के निर्देश दिए है. इस मामले में निलंबन की कार्रवाई भी हो सकती है, ऐसा जानकारों का कहना है.

संबंधित अधिकारियों की सफाई

तहसीलदार संतोष खंडारे और नायब तहसीलदार संध्या खोडे ने इस मामले ने अपनी सफाई देते हुए कहा है कि नागपुर जिप के उपचुनाव का कार्यक्रम जब जारी किया गया था उस समय कोरोना महामारी चल रही थी. हिंगणा तहसील में संक्रमितों की संख्या बहुत ज्यादा थी. तहसील कार्यालय में कार्यरत 80 फीसदी कर्मचारी और उनके परिजन संक्रमित हुए थे. ऐसे गंभर हालातो में भी तहसील कार्यालय ने मतदाता सूचि जारी की थी. इस पर आपत्ति भी मंगवाई गई थी. लेकिन किसी ने आपत्ति नहीं ली. तीन माह के बाद जुलाई माह में चुनाव कार्यक्रम जारी हो गया. उम्मीदवारों ने फॉर्म भरे और तहसील कार्यालय से सूचि भी ली थी. लेकिन चुनाव रद्द हो गया. सितंबर माह में दुबारा कार्यक्रम जारी किया गया. इसमें उम्मीदवारों को प्रचार के लिए 10 से 15 दिन भी मिले. उस समय भी किसी भी उम्मीदवार ने इस मामले में कोई शिकायत नहीं की थी. मतदान के दिन के मामला पता चा. इस संबंध में दोनों ने अपना जवाब भी आयोग को भेज दिया है.

खांडरे का चंद्रपुर में भी कार्यकाल रहा विवादित

चंद्रपुर के निवासी संतोष खांडरे इससे पहले चंद्रपुर के तहसीलदार रहते हुए काफी विवादित रह चुके है. उल्लेखनीय है कि उनकी चंद्रपुर स्थित संपत्ति की जांच करने की कई बार मांग की जाती रही है. इसके बाद उनका तबादला नागपुर किया गया था. लिपिक पद पर नोकरी पर लगे संतोष खांडरे प्रमोशन के बाद चंद्रपुर के तहसीलदार बनाये गए थे. जिले में उनके एक बड़े नेता के करीबी होने के काफी चर्चे रहे. यह भी कहा जाता रहा कि उन्ही के आशीर्वाद की वजह से उनपर कभी कार्रवाई नहीं की जाती है.