गांधी दर्शन : गांधी के अहिंसा परमो धर्म पर आतंक का खूनी प्रहार

वसुदेवकुटुम्बकम! दुख मिलकर बांटो! हे प्रभू! सब का कल्याण हो ! देने में उदारता और मांगने में विनम्रता रखो ! जरूरतमंदो की सदैव मदद करो! मारपीट, खून खराबा, लड़ाई -झगड़ा और हिंसा से बचो! जी हां, ये सब बड़े -बड़े आदर्शवादी विचारों को बुनियादी प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करते समय बचपन में हम सबने गंभीरता से सीखा और किसी तोते की तरह रट रटकर व्यवहार करते हुए आज यहां तक पहुंचें हैं। ये केवल कोई वाक्य नहीं हैं बल्कि भारतीय संस्कृति के उन महान महापुरुषों, साधुसंतों, ऋषि मुनियों और हमारे आदर्श गुरूजनों ने ही ये सब सिखाया हैं। किन्तु आज इन शब्दों को हमारी ही धरती पर जातिगत और क्षेत्रीयता का जहर घोलकर वैमनस्यता पैदा कर दी हैं। आतंक के इस खौफ ने आपस में ही हमको एक दूसरे का दुश्मन बना दिया हैं। राष्ट्रीयता, देशप्रेम और आपसी भाईचारे वाली सर्व धर्म समभाववादी इंसानी सहिष्णुता को आतंकवादियों की खूनी बुरी नजर लग गई हैं।

भगवान बुध्द और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के महान जीवन दर्शन अहिंसा परमो धर्म को मानने वालों को आज आतंक के सांये में जीवन और मौत से जूझना पड़ रहा हैं। वहीं मौकापरस्त देश के गद्दार तथाकथित लोग भारत की एकता,सम्प्रभुता और भाईचारे को कलंकित करने में जुटे हुए हैं।

अहिंसा परमो धर्म ! मानवता और समूल जीव जगत के जीवन के लिए ये तीन अक्षर कितने गंभीर और महत्वपूर्ण हैं इसे बार बार पढ़ने और दोहराने मात्र से आतंरिक दुष्प्रवृतियां स्वमेव ही दूर हो जाती हैं। भगवान बुध्द ने यह संदेश हजारों साल पहले ही दे दिया था परन्तु आचरण करने और व्यवहार में अमल करने वालों ने अपनी आध्यात्मिक जिंदगी को तो संवारा ही। साथ ही, उन्होंने कई लोगों के जीवन को भी इन तीन अक्षरों के आधार पर जीवन शैली ही बदलकर रख दी। आगे चलकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने आजादी के समय इसे सबसे बड़ा मंत्र बनाकर लाखों लोगो कि जिंदगी बचाई और भारत को आजाद कराने में अंग्रेजों को घुटने टिकवा दिए। आजादी के बाद से या यूं कहे कि बापू गांधीजी के जाने के बाद से देश में कई जटिल राजनैतिक परिस्थितियों का जन्म हुआ और हालात तेजी बदलने लगे। परिणाम आज हम सबके सामने हैं। काश्मीर के मुद्दें पर अबतक लाखों लोगों की कुर्बानियों का एक इतिहास हैं। आज भी मौत का खूनी संघर्ष बदस्तूर जारी हैं। गरीब,असहाय और रोजगार से जुड़े जरूरतमंद परराज्य प्रवासियों को बेहरमी से मारा जा रहा हैं। जाति और क्षेत्रीयता के नाम पर मौत का यह खेल अब एक राजनैतिक रंग में रंगता जा रहा हैं। हर कोई अपनी राजनैतिक रोटियाँ सेंककर कहीं ना कहीं प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से देश की अवाम को गुमराह करने में जुटें हुए हैं। अहिंसा परमो धर्म का सब उल्टा करने वाले हिंसक आतंकवादियों और मौकापरस्त अलगाववादियों के चेहरों से नकाब उतर चुका हैं। कुछ देश आतंकवाद को बढ़ावा देकर आपसी अमन चैन और भाईचारे के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। उन्हें याद रखना चाहिए कि महाभारत का यह श्लोक उन्होंने भारत के संदर्भ में अभी तक अधूरा पढ़ा हैं। अहिंसा परमो धर्म : हिंसा तथैव च:। अर्थात भगवतगीता में साफ लिखा हैं कि अहिंसा मनुष्य का परम धर्म हैं किन्तु धर्म और राष्ट्र कि रक्षा के लिए हिंसा करना उससे भी श्रेष्ठ धर्म हैं। स्पष्ट हैं कि अहिंसा की अवहेलना या उसकी आड़ में बार बार कोई हिंसा करता हैं या आम लोगों को आहत करता हैं या बेवजह बेकसूर लोगों का खून बहाया जाता हैं तो ऐसी स्थिति में उनके समूल खात्मे के लिए हिंसा को अपनाना ही एकमेव धर्म कहा गया हैं। सच तो यह हैं कि इस श्लोक को कभी पूरा पढ़ा नहीं जाता रहा हैं। पांच हजार साल पहले भगवतगीता में लिखा यह श्लोक आज उतना प्रासंगिक हैं जितना उस समय पांडवों वनवास के दौरान ऋषि महामुनि मारकेन्डेयजी ने एक भेंट में यह बात कही थी। आजादी के बाद से हम सब महात्मा गांधी के दर्शन को आत्मसात करके आगे बढ़ रहे हैं। किन्तु आज हालात बिल्कुल बदल चुके हैं। पाकिस्तान ने काश्मीरियों का जीना हराम कर दिया हैं। आए दिन मौत का तांडव व बेगुनाहों की जिंदगी के साथ खूनी मंजर का हिंसात्मक खेल बंद होने का नाम नहीं ले रहा हैं। बिहारी मजदूरों की हत्या और सेनाओं पर हमलें, सर्व धर्म समभाव और इंसानियत की शिक्षा देने वाले शिक्षकों को बेहरमी से गोलियों से छलनी कर देना केवल बुझदिलों और दरिंदों का काम हैं उन्हें अहिंसा के धर्म से नहीं वरन हिंसा के धर्म से उन्हीं की भाषा में समूल नष्ट करने का बीड़ा उठाया गया हैं। सूत्रों कि माने तो धैर्य और सब्र का बांध टूट चुका हैं। खबर हैं कि काश्मीर में सेना प्रमुखों के दौरे,राष्ट्रपति रामनाथ कोविद की दशहरा यात्रा, गृहमंत्री अमित शाह का दौरा ये सब स्पष्ट करते हैं कि काश्मीर में जरूर कुछ बड़ा घटने वाला हैं। वरना चैनलों से ऐसी खबरें बाहर नहीं निकलती ! सेना का लामबंद होना और नेताओं का बड़े बयानबाजी से बचना भी बता रहा हैं कि सीमा पर किसी बड़े तूफान या भूचाल के आने की संभावना अवश्य हैं।

आतंकवादियों के आकाओं को अब डर लगने लगा हैं कि काश्मीर के अंदर अब उनका एक तरफा सफाया होना तय हैं। सीमा पर आतंकवादियों के पनाहगाह बने अडडों की खौफियां जानकारी वाला खाका पूरा तैयार हो चुका हैं। पकड़े गये आतंकियों ने जो कबूला हैं अब उनकी निशानदेहियों पर सेना का कहर बरपना ही हैं। अमित शाह ने साफ कह दिया हैं कि भारत अब पाकिस्तान को बताकर सर्जिकल स्ट्राईक करने वाला हैं। भाड़े के आतंकियों और पाक परस्त उनके हथियार पहुंचानें वाले दलालों की उल्टी गिनती आरंभ हो चुकी हैं। दीपावली के पहले या जल्दी ही सेना कोई बड़ा कदम उठाकर देशवासियों की दीपावली में डबल खुशियां जोड़ सकती हैं। देश के मीडियों चैनलों को चाहिए कि आतंकवादियों और अलगाववादियों की नापाक हरकतों को अवाम के सामने उजागर करें ना कि आर्यन ने आज जेल में ये खाया। आर्यन आज फोन किया। आर्यन ने गलती पर माफी मांगी। आर्यन ने जेल में ऐसे दिन काटे। ये कोई राष्ट्रीय गंभीर मुद्दों कि बातें हैं ? ऐसी चैनलों की खबरों पर अवाम को भी हंसी आती हैं देश की सीमा पर हालात कैसे हैं और काश्मीर में अमन चैन को आतंकवादी लहूलुहान कर रहे हैं। ऐसे में आर्यन के गीत गाने वाली चैनलों को दूसरी चैनलों से भी सीखना चाहिए।

डां. तेजसिंह किराड़
वरिष्ठ पत्रकार व शिक्षाविद