वेकोलि पद्मापुर खदान डेंजर जोन घोषित ; 960 कामगार संकट में

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  • वेकोलि नागपुर के डीजीएमएस ने लागू की प्रतिबंधित धारा २२

  • उत्खनन व आवागमन पर रोक, हादसे की गहनता

  • जवाबदेह दोषी अधिकारियों के खिलाफ होगी कार्रवाई

चंद्रपुर : बुधवार १८ नवंबर को दोपहर १ बजे के दौरान चंद्रपुर वेकोलि मुख्यालय के तहत आने वाले पद्मापुर ओपन कास्ट (खुली कोयला खदान) में घटित बड़े हादसे में टीला ढह गया था। इससे वेकोलि को करोड़ों का नुकसान होने की सूचना मिलते ही गुरुवार को नागपुर वेकोलि मुख्यालय की डीजीएमएस की टीम ने पहुंचकर घटना स्थल का मुआयना किया। इसे डेंजर जोन घोषित करते हुए खान परिसर में प्रतिबंधित धारा २२ लगाने के आदेश दिये गये। इसके चलते अब लंबे समय के लिए खान का कामकाज व उत्पादन ठप रहेगा। यहां कार्यरत ९६० कामगारों में जहां हादसे का खौफ बना हुआ है, वहीं धारा २२ के चलते अधिकांश खान कामगारों को स्थलांतरित करने की समस्या निर्माण हो गई है।

● जांच के बाद तय होगी जवाबदेही
खान हादसे के बाद वेकोलि को करोड़ों का नुकसान हुआ है। इस क्षति के लिए जिम्मेदार वेकोलि के अधिकारियों की जांच नागपुर मुख्यालय से की जा रही है। स्थानीय अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए डारेक्टर जनरल ऑफ माइन्स सेफ्टी(डीजीएमएस) सागेश कुमार के साथ डारेक्टर टेक्नीकल ऑपरेशन मनोज कुमार की टीम हर पहलु की जांच में जुटी हुई है।

कैसे बच पाये ६ कर्मचारी ?
पद्मापुर ओपन कास्ट में सुबह ८ से १ बजे तक १ बजे से शाम तक कामकाज चलता है। सुबह घटना स्थल पर मशीन ऑपरेटन एन. जी. मिश्रा, ए. बी. लोनघाडगे, वी. आर. चिथाडे, ए. एम. पांढरे तथा ताहिर हुसैन गये थे। करीब १ बजे वे घटना स्थल से शेल्टर परिसर में लौट आये। लंच टाइम के बाद जब मशीन ऑपरेटर शिवानंद तागडे, एम. जे. देवगडे, एस. के. नले एवं एन. एम. कुलमेथे घटना स्थल पर गये, तो उन्हें ५०० मीटर ऊंचे टीले से पत्थरों के खिसकने की आहट महसूस हुई। सभी कर्मचारियों को घटना स्थल से दूर जाने की हिदायत दी गई। परंतु विशाल मशीनों के शुरू होने तथा कर्कश ऊंची आवाज के कारण शिवानंद तागडे को खतरा की सूचना नहीं मिल पायी। दूर खड़े कामगारों को शिवानंद की तरफ पत्थर फेंककर उसका ध्यानाकर्षण किया। जैसे ही टीला ढहने लगा शिवानंद अपना मोबाइल व अन्य सामग्री छोड़ सुरक्षित स्थल की ओर भागा। इस तरह से सभी कामगारों की जान बन गई।

● 100 करोड़ की सामग्री जमींदोज
मिट्टी, मलबा, रेत का टीला अचानक ढह जाने के कारण सौभाग्य से कामगारों की जान तो बच गई, लेकिन इस हादसे में वेकोलि को करोड़ों का नुकसान हुआ है। इस हादसे के वक्त ९४२, ८१६ एवं ८९० क्रमांक की ड्रील मशीनों के अलावा विशाल पंप मोटार, ट्रांसफार्मर, ओसीबी समेत अनेक कीमती सामग्री मलबे के ढेर में समा गई। ९४२ नंबर की ड्रीन मशीन को ५ माह पूर्व ही वेकोलि ने यहां उतारा था। रोटाकोला नामक इस प्रत्येक मशीन की कीमत करीब २५ करोड़ रुपये हैं। इस लिहाज से वेकोलि को करीब १०० करोड़ की क्षति हुई है। वहीं प्रतिबंधित धारा २२ लागू किए जाने से अनिश्चित काल के लिए खान का उत्पादन ठप होने एवं कामगारों को खाली बिठाने की नौबत आन पड़ी है। ढह चुके मलबे को हटाने में न्यूनतम एक माह का समय लगने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है।

● स्लोप स्टडी रडार मशीन का नहीं किया उपयोग
आमतौर कोयले के ओपन कास्ट में कोयला उत्खनन के लिए करीब ५०० मीटर गहरा व विशाल गड्ढा खोदा जाता है। यह गड्ढा किसी भी तालाब से काफी बड़े आकार का होता है। कोयला स्थल तक पहुंचने, उत्खनन करने एवं कोयले का परिवहन करने के लिए ओपन कास्ट बेंच बनाये जाते हैं। इसके लिए बड़े पैमाने पर बारुद का इस्तेमाल कर असंख्य विस्फोट किए जाते है। इससे बेंचेस को सेट किया जाता है। इन बेंचेस के खिसकने का खतरा न होने पाये इसके लिए आधुनिक तकनीक के मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है। भूस्खल से बचने के लिए एवं बेंचेस के भितर चल रही मिट्टी की अत्यंत मामूली गतिविधियों का आकलन करने के लिए स्लोप स्टडी रडार नामक मशीन का उपयोग किया जाता है। परंतु पद्मापुर खदान में इस मशीन का उपयोग न किए जाने की जानकारी है। जबकि बल्लारपुर ओपन कास्ट के लिए इस मशीन का उपयोग किया जा रहा है।

● सुरक्षा प्रबंधन की चूक से तय होगी जवाबदेही
नागपुर वेकोलि मुख्यालय से पद्मापुर ओपन कास्ट पहुंची टीम ने यहां के सुरक्षा प्रबंधन में हुई खामियों की गहराई से जांच शुरू की। घटना स्थल का मुआयना कर हर पहलुओं का जायजा लेने के बाद डारेक्टर जनरल ऑफ माइन्स सेफ्टी सागेश कुमार के साथ डारेक्टर टेक्नीकल ऑपरेशन मनोज कुमार के दल ने इस स्थल को डेंजर जोन घोषित करते हुए यहां प्रतिबंधित धारा २२ लागू किया। पद्मापुर खान प्रबंधक अमित चतुर्वेदी एवं उपक्षेत्रीय प्रबंधक देवेंद्र प्रसाद के अलावा डिस्पैच मैनेजर जे.पी. श्रीवास्तव से गहन पूछताछ आज भी जारी है। जांच प्रक्रिया के समाप्त होने के बाद स्थानीय अधिकारियों की ओर से दी गई रिपोर्ट के आधार पर जवाबदेही तय किए जाने की बात आला अधिकारियों ने कही है।

● जांच के बाद ही सही आकलन
पद्मापुर खदान में घटित हादसे की जांच वेकोलि प्रबंधन की ओर से की जा रही है। कहां क्या चूक हुई है और इसकी जवाबदेही किसकी थी आदि सवालों के जवाब नागपुर मुख्यालय के आला अधिकारी दे पाएंगे। हम जांच के पश्चात इसकी रिपोर्ट नागपुर भेज देंगे। आगे की कार्रवाई नागपुर कार्यालय की तय करेगा। कहां कितना नुकसान हुआ है, यह फिलहाल बता पाना मुश्किल है।
देवेंद्र प्रसाद, उपक्षेत्रीय प्रबंधक पद्मापुर, वेकोलि

 

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