राज्य में लॉकडाउन तय, लेकिन 14 अप्रैल के बाद निर्णय

पिछले कुछ दिनों से राज्य में कोरोना का संकट बहुत तेजी से बढ़ा है. इस बढ़ते संकट के नियंत्रण की राह तलाशने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने रविवार को राज्य के टास्क फोर्स की बैठक बुलाई.

मुंबई : फिलहाल आज यानी रविवार के लिए महाराष्ट्र में लॉकडाउन टल गया है. रविवार को जो बैठक हुई उसमें एक बात तय हो गई कि महाराष्ट्र में लॉकडाउन की स्थिति पूरी तरह से बन चुकी है, लेकिन लॉकडाउन के लिए कैसे जाएं, इसकी तैयारी के लिए और चर्चा के लिए कल सुबह 11 बजे मंत्रिमंडल की फिर एक अहम मीटिंग होने वाली है. इस बैठक में उपमुख्यमंत्री अजित पवार भी शामिल होंगे. यानी लॉकडाउन लगाने को लेकर बैठकों की चर्चा का सत्र शुरू है. पहले शनिवार को हुई सर्वदलीय बैठक में चर्चा, फिर रविवार टास्क फोर्स से मुख्यमंत्री की हुई चर्चा, इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री की मुख्य सचिव से बातचीत और सोमवार सुबह 11 बजे कैबिनेट से मुलाकात. इस तरह सारी तैयारी के बाद 14 अप्रैल के बाद पूरे राज्य में लॉकडाउन लगना अब तय हो गया है. बस तैयारी के लिए निर्णय में देरी हो रही है.

पिछले कुछ दिनों से राज्य में कोरोना का संकट बहुत तेजी से बढ़ा है. इस बढ़ते संकट के नियंत्रण की राह तलाशने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 11 अप्रैल, रविवार 5 बजे राज्य के टास्क फोर्स की बैठक बुलाई. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई यह बैठक करीब सवा दो घंटे तक चली. बैठक खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे के साथ फोन पर बातचीत की.

14 दिनों के लॉकडाउन के बिना कोरोना कंट्रोल होना संभव नहीं

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने जहां 8 दिनों के लॉकडाउन के पक्ष में अपना मत दिया तो दूसरी तरफ टास्क फोर्स के ज्यादातर विशेषज्ञों का मत था कि 14 दिनों का लॉकडाउन लगाया जाए तभी स्थिति नियंत्रण में आ सकेगी. लेकिन बैठक में एक बात स्पष्ट थी कि मुख्यमंत्री और टास्क फोर्स के ज्यादातर सदस्य एकमत से लॉकडाउन लगाए जाने के समर्थन में थे. विचारों में अंतर सिर्फ लॉकडाउन की अवधि को लेकर ही था.

लॉकडाउन तय, 14 अप्रैल के बाद निर्णय

राजेश टोपे ने मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद मीडिया से बात करते हुए बैठक में तय हुए मुद्दों की जानकारी दी. स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि ये बैठक सिर्फ टास्क फोर्स के विशेषज्ञों की थी. इसमें लॉकडाउन पर सहमति जताई गई. ज्यादातर सदस्यों की यही राय थी कि लॉकडाउन ही एकमात्र विकल्प है. साथ ही एक बड़ा मुद्दा ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के उपायों का था.

‘ऑक्सीजन की कमी और शवदाहिनी की समस्या पर निर्णय’

राजेश टोपे ने कहा कि ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए ऑक्सीजन का उत्पादन कैसे बढ़ाया जाए, इस पर चर्चा की गई. ये कहा गया कि लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट हर जिले में लगाया जाएगा. लेकिन ये प्रयोग जरा खर्चीला है. लेकिन मुख्यमंत्री ने इस पर काम करने में सहमति जताई. प्लांट लगाए जाने के 10-15 दिनों में स्थिति नियंत्रण में आ जाएगी और रोज-रोज ऑक्सीजन की कमी की समस्या से बाहर आने में मदद मिलेगी.

‘रेमडेसिविर के निर्यात बंदी की राज्य सरकार की मांग केंद्र ने मानी’

आगे राजेश टोपे ने कहा कि रेमेसिविर के इस्तेमाल पर भी चर्चा की गई. अगले 10-15 दिनों तक सोच-समझकर इसका इस्तेमाल जरूरी है. इनकी बर्बादी रोकी जाए. कंपनी सीधे कलेक्टर के जरिए अब निजी अस्पतालों को इंजेक्शन उपलब्ध करवाएगी और सरकारी अस्पतालों में कंपनी से सीधा सप्लाई किया जाएगा, इससे कालाबाजारी पर रोक लग सकेगी. टोपे ने बताया कि केंद्र सरकार ने भी राज्य सरकार की विनती मान ली और रेमडेसिविर के निर्यात पर आज रोक लगा दी. इससे रेमडेसिविर की कमियों पर बहुत हद तक नियंत्रण किया जा सकेगा. राजेश टोपे ने कहा कि लॉकडाउन की परिस्थिति बन चुकी है इस बात पर कुछ सदस्यों को छोड़ कर टास्कफोर्स के ज्यादातर सदस्य एकमत थे.