चंद्रपुर | थानेदारों के तबादलों पर उठने लगे सवाल

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चंद्रपुर : जिले में थानेदारो के जिला अंतर्गत तबादले हुए है। इन तबादले की प्रणाली में बड़े पैमाने पर आर्थिक लेनदेन होने की चर्चा पुलिस विभाग में शुरू है।
शराब बंदी से कुछ विशिष्ट शाखा तथा पुलिस थाना को महत्व प्राप्त हुवा है।
जिससे तबादला कर जाने वाले कुछ अधिकारी ‘एड़ीचोटी’ का जोर लगाकर पुनः चंद्रपुर लौटे है।
अब स्थानिक अपराध शाखा की ज़िम्मेदारी बालासाहेब खाडे को मिली है। लेकिन इसी पद पर कुछ अन्य अधिकारियों की नजरे भी टिकी है। जिससे आने वाले समय में पुलिस निरीक्षको के बीच में अच्छा शीतयुद्ध रंगने की संभावना दिखने लगी है।

जानकारी मिल रही है कि चंद्रपुर जिले की शराब बंदी के मद्देनजर कुछ माह पूर्व नियोजन के साथ बैठक लेकर अवैध शराब के अलिखित परवाने बाटे गए। पुलिस, राजनेता का हिस्सा भी इसमें तय किया गया हैं। सब अच्छे से चल रहा था। इससे पूर्व जिले के पुलिस अधीक्षक डॉ. महेश्वर रेड्डी का तबादला हुआ।
उनकी जगह पर अरविंद सालवे ने जिला पुलिस अधीक्षक का पदभार संभाला। सालवे ने आते ही अवैध शराब तस्करों पर शिकंजा कसने 4 विशेष पथक स्थापित किए। लेकिन बाद में इस पथक का क्या हुवा यह सालवे ही बता सकेंगें।

इस दौरान एलसीबी के ओमप्रकाश कोकाटे का तबादला कार्यकाल पूर्ण होने से हो गया। पहले से ही उनका तबादला होगा यह सोचकर कुछ नेताओं के द्वार पर दस्तक देना शुरू कर दिए थे, ऐसा कहा जा रहा है।
जिसमें ब्रह्मपुरी के थानेदार खाड़े ने बाजी मारी। पहले वो बल्लारपुर जाने के इछुक थे। लेकिन उनका कार्यकाल देख स्थानीक विधायक ने उन्हें रेड सिग्नल दिखाया। आखिरकार खाडे चंद्रपुर आ गए।

शराबबंदी जिले में शराब की आपूर्ति करने की जिमेदारी यहा के अवैध शराब व्यावसायिको ने ली है।
घुग्घूस मार्ग से चंद्रपुर में बड़ी मात्रा में शराब आती है। इस बात से पुलिस भी इंकार नही किया जा सकता।
कुछ साल पहले इसी पुलिस थाने के निरीक्षक सुधाकर अंभोरे थे। उन्होंने एलसीबी का कार्यभार भी संभाल है।
शराब बंदी में घुग्घूस तथा एलसीबी विभाग की अच्छी परख है। वह दो वर्ष पूर्व ही नागपुर ग्रामीण दल में गए। लेकिन वहां जाने के बाद भी उनकी नजरे चंद्रपुर पर थी। आखिरकर उन्हें भी नागपुर मार्ग से चंद्रपुर मिला।
वह चंद्रपुर आए लेकिन उनके पूर्व खाड़े ने रात 12 बजे ही अपना पदभार संभाल लिया। जिससे अब अंभोरे ‘ वेट् एंड वाच’ की भूमिका में है।

उन्हें जिले के अवैध शराब विक्रेताओं के चप्पे चप्पे पता है। इस पहचान का लाभ भविष्य में वरिष्ठ अधिकारी लेंगे ऐसी उम्मीद अंभोरे को है। शराब बंदी के लिए ब्रह्मपूरी महवत्पूर्ण जंशन है। यही खाड़े थे, अब उनकी जगह नागपुर ग्रामीण पुलिस के मल्लिकार्जुन इंगले आए है। इंगले 2 वर्ष पूर्व सिंदेवाही के थानेदार थे। उन्हें भी चंद्रपुर जिले के थाने का महत्व अच्छे से पता है। वे भी इस जिले को काफी याद कर रहे थे।

आखिरकार उन्होंने काफी ‘परिश्रम’ कर ब्रम्हपुरी पहुचे। इस तबादले दौरान अब शराब मोहल्ला कमिटी की भी पुनःरचना होने वाली है। शराब की कीमत तथा कमीशन बढ़ाया गया।
आने वाले समय में शराब तस्करों का कार्य तय किया जाएगा। उसके बाद ये गाड़ी पटरी पर आएगी, ऐसा कहा जा रहा है।

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